Monday 12 November 2012

39. तिथियों की तिकड़म

आज एक ग़ज़ल बार-बार गुनगुनाने को मन कर रहा है "एक ब्राह्मण ने कहा है कि साल अच्छा है !" ज्योतिषियों के अनुसार आज की तिथि यानि 10.11.12 अंक के बढ़ते क्रम के अनुसार होने के कारण बहुत शुभ है। उनके अनुसार यह दिन उनके लिए ज्यादा सौभाग्यशाली है जिनका जन्म आज हुआ है या आज होगा। यह तिथि इस सदी की ऐसी तिथि है जो दुबारा नहीं आयेगी। हाँ, ये सच है कि कोई ख़ास तिथि हमारे जीवन में ख़ास महत्व रखती है। यूँ तो हर बीता लम्हा दुबारा नहीं आता पर हर लम्हा ख़ास होते हुए भी ख़ास नहीं होता। आम दिनों सा हर दिन बीत जाता है। लेकिन ख़ास तारीख का हमें इंतज़ार रहता है। और इन ख़ास तारीख पर देश ही नहीं दुनिया के तमाम ज्योतिष अपनी अपनी भविष्यवाणी करते हैं। शुभ क्या-क्या है और क्या-क्या हो सकता है, ये तो कोई नहीं जानता लेकिन शुभ-अशुभ जानना हर कोई चाहता है। शुभ-दिन शुभ-घड़ी शुभ-तिथि शुभ-साल शुभ शुभ शुभ ... ! 

हर कोई अपने लिए शुभ चाहता है और दूसरों को शुभ का सन्देश देता है। लेकिन शुभ-अशुभ की ठीक-ठीक व्याख्या न कोई ज्योतिष कर पाता है न कोई इंसान निर्धारित कर पाता है। एक ही घड़ी-नक्षत्र में जन्म लिए हुए दो व्यक्ति का जीवन दो दिशा में चला जाता है। कोई सुख सुविधा से परिपूर्ण जीवन पाता है तो कोई आजीवन कष्ट में जीवन यापन करता है। कोई बिना लड़े दुनिया जीत लेता है तो कोई जीवटता से लड़ते हुए न सिर्फ जंग हारता है बल्कि जीवन भी हार जाता है। किसी की पूरी ज़िंदगी कांटो भरी राह पर चलते हुए गुजरती है तो किसी की राहों में सिर्फ फूल ही फूल बिछे होते हैं। तमाम जद्दोजहद के बाद भी किसी का जीवन बिना जीए ही ख़त्म हो जाता है तो कोई जीवन ख़त्म करने के सारे उपाय करके भी जीवन ढ़ोता रहता है। किसी के जीवन में सिर्फ अन्धेरा ही अन्धेरा होता है तो कोई अंधेरों में खुद को ही जला कर रोशनी करना सीख जाता है। आखिर ऐसी तकदीर कैसे? किसने  बनाई? अगर तकदीर बदल सकती है तो फिर ऐसी तकदीर मिली ही क्यों? बहुत सारे क्यों, लेकिन इस क्यों का निवारण भी है अगर ज्योतिष के पास जाएँ।

ज्योतिषियों ने कहा कि पिछले जन्म के पाप-पुण्य इस जन्म की तकदीर का निर्धारण करते हैं। किसी का जन्म संपन्न परिवार में होगा या विपन्न, कौन किस जाति में जन्म लेगा, किसका जीवन आनंददायक होगा और कौन आजीवन कष्ट भोगेगा, इन सबका कारण पिछले जन्म का किया गया हमारा कार्य है। मृत्यु के बाद कौन स्वर्ग में जाएगा कौन नरक में इसका निर्धारण इस जन्म का हमारा कार्य करेगा। अगर हमारे तकदीर में कोई कमी है तो उसके निवारण का उपाय भी इन ज्योतिषियों ने कर रखा है। हमारी कुण्डली में यह निर्धारित होता है कि कौन सा ग्रह हमपर क्या असर डालेगा और क्या करने से किसी ख़ास ग्रह के प्रकोप से बचा जा सकता है। अगर जीवन में अकस्मात् कोई घटना घट जाए जो बुरी हो या फिर कोई बुरी घटना न घटे इसके लिए एक नहीं कई उपाय हैं। जैसे अलग अलग मर्ज़ के लिए अलग अलग डॉक्टर वैसे ही अलग अलग मर्ज़ के लिए अलग अलग उपाय। 

अक्सर सुना है कि ये बुरा वक़्त और ये अच्छा वक़्त। अब बुरा में क्या क्या होगा ये कैसे पता चले। जीवन सहजता-सरलता से चलता रहे तो अच्छा वक़्त और जीवन में ज़रा भी बाधा या विघ्न आये तो बुरा वक़्त। कभी भी कोई ज्योतिष स्पष्टतः यह नहीं बताता कि अच्छा या खराब में क्या-क्या शामिल किया जाए। कई बार जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब लगता कि जीवन बस अब यहीं ख़त्म ... लेकिन वही कारण किसी दुसरे के लिए महत्वपूर्ण नहीं होते, और उनके हिसाब से ये जीवन के अंत की वज़ह नहीं हो सकते। कई बार बिलकुल सामान्य सी लगने वाली घटना किसी का जीवन पूरी तरह से बदल देती है तो वही घटना किसी के लिए अर्थहीन होती है। कोई अनहोनी किसी का सम्पूर्ण जीवन बदल देती है तो कई बार कोई अनहोनी किसी को उसके राह से डिगा नहीं पाती। 

मुमकिन है हमारी संवेदनाएँ इन सब के लिए जिम्मेवार हो। मगर ज्योतिष? क्या किसी मनुष्य में इतनी ताकत है कि वो भविष्य के बारे में बता सके? किसी अंगूठी में इतनी क्षमता है कि ईश्वर द्वारा लिखी हुई तकदीर को हमारी इच्छा और कामना के अनुरूप बदल सके? क्या कोई तिथि शुभ-अशुभ होती है? अगर होती है तो इसकी जानकारी रखने वाला क्यों नहीं स्पष्ट रूप से बता देता कि क्या-क्या शुभ होगा और क्या-क्या अशुभ। अगर अशुभ होने के संकेत मिले तो उसे शुभ में बदलने के उपाय समय रहते ही कर लिया जाए तो फिर इस पृथ्वी पर कोई असंतुष्ट न रहेगा। मुमकिन है ऐसा इसलिए नहीं करते होंगे की अगर सभी सुखमय हो जाएँ तो दुखी मन कहाँ से आए जिनको राहत देने के लिए इन भविष्यवक्ताओं के बाज़ार कायम रहे। स्वार्थ की पूर्ती के लिए अगर इन पर भरोसा कर एक आध अंगूठी पहन ली जाए तो इसमें बुरा क्या है। ऐसी सोच ... घोर अनर्थ ... आखिर ये भी तो जीविका के साधन हैं और जीवन यापन का सभी को अधिकार है। भला इसमें गलत क्या है? अब कोई ज्योतिष तो किसी के पीछे नहीं पड़ता कि भई अपना भविष्य जान लो। लोग अपनी इच्छा से आते हैं ताकि जीवन सँवार सकें, अब इसमें बेचारे ज्योतिषियों का क्या दोष?

यूँ अब भविष्यवाणी पर ब्राह्मणों का एकाधिकार नहीं रहा। समय के साथ सब कुछ बदल गया है। जो भी चाहे ज्योतिष शास्त्र पढ़ कर इस पेशा को अपना सकता है और धन अर्जित कर सकता है। बस इतना कोई बता दे आज के दिन क्या-क्या अच्छा होगा और आने वाली कौन सी ख़ास तिथि क्या-क्या ख़ास खुशियाँ देंगी। इस सदी के इस अनोखे दिन में दुनिया में क्या-क्या ख़ास होने वाला है बस ये जानने का इंतज़ार है। वैसे भी आज का दिन अच्छा है तो भई शुभ-शुभ बोलो। अब ब्राह्मण ने कहा है तो मान लेते हैं कि आज का दिन शुभ है। आज का दिन शुभ हो !

- जेनी शबनम (10.11.12)

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2 comments:

रश्मि प्रभा... said...

होनी तो अदृश्य शक्ति के हाथों में है , संकेत मिलते हैं कभी कभी- पर कोई तय नहीं कर सकता

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बढिया,
बहुत बढिया