Monday, April 4, 2011

21. नाथनगर के अनाथ

वो दो छोटी लडकियां बड़ी बड़ी आँखों से मुझे एक टक देख रही थी, शरीर बिल्कुल शांत जैसे कि मृतप्राय, सिर्फ आँखें हीं जीवित लेकिन वो भी स्थिर, मानो पथरा गई हो| जाने क्या था उन ख़ामोश नज़रों में कि मेरी नसों में अजीब सी सिहरन दौड़ गई, मानो जीवित लाश देख लिया हो मैंने| सिर चकराने लगा और मैं जल्दी से दरवाज़े को पकड़ ली, मेरे मित्र भी घबरा गए कि अचानक क्या हो गया मुझे| वो लोग जल्दी से मुझे लेकर बाहर निकले और सामने कुर्सी पर बिठाया| फ़रवरी 2010 के होली के समय की घटना है ये, लेकिन मैं उस ठंड के दिन में भी पसीने पसीने हो गई| मेरी आँखें जैसे उन्ही दोनों पर ठहर गई थी या कि मेरा पीछा कर रही थी, और मैं चारो तरफ अजीब सी भयभीत होकर देखने लगी| मैं होश खो चुकी थी, घबराहट इतनी होने लगी कि एक शब्द भी बोल न पायी, महज़ इशारा कर सकी कि मैं ठीक हूँ|


ये नाथनगर का अनाथालय है, जहां दोनों बच्ची कुछ दिन पूर्व हीं लाई गई थी, कोई इन्हें भागलपुर रेलवे स्टेशन की पटरियों पर फेंक गया था| दोनों लड़कियाँ लगभग 3-4 साल की थी लेकिन अवस्था के मुताबिक़ महज़ 2 साल की लग रही थी| जब ये लाई गई तो बिल्कुल मरणासन्न अवस्था में थी, और जाने कब से भूखी थी कि रो भी नहीं पा रही थी| जैसे हीं मैं इन्हें देखी तो सोचने लगी कि अगर उस दिन कोई न देखता तो ये दोनों आज यहाँ नहीं बल्कि इनका शरीर ट्रेन से कटा हुआ वहाँ पड़ा होता| उफ्फ्फ्फ़… ये सब दिमाग में इतनी तेजी से आया और साथ हीं उस दृश्य की कल्पना कि ये दोनों वहाँ ट्रेन से कटी पड़ी होती, मेरा दिमागी संतुलन बिगड़ गया था| सोचती रही कि कैसे कोई माँ 9 महीना कोख़ में रखकर और 3-4 साल परवरिश कर यूँ मरने केलिए छोड़ गई होगी| अगर ये दोनों मर जाती तो उसकी माँ पर क्या बीता होता? हो सकता है दूर के किसी गाँव से उसकी माँ से छुपाकर बच्ची को यहाँ ला कर मरने के लिए कोई रख गया हो? अगर मार देना नहीं चाहा होता तो किसी मन्दिर या अस्पताल या किसी सार्वजनिक जगह रख गया होता जहाँ वो सुरक्षित होती? यूँ पटरी के पास छोड़ दिया ताकि रात के अँधेरे में कोई ट्रेन इन्हें ख़त्म कर दे| शायद इनकी तकदीर से ट्रेन लेट थी सो सुबह तक कोई ट्रेन नहीं गुजरी उस पटरी से, अन्यथा… सोचकर देह सिहर जाता है... ओह्ह्हह्ह! 


'हिन्दू अनाथालय', नाथनगर, भागलपुर, की स्थापना श्री कैलाश बिहारी लाल ( एम.पी) ने सन 1925 में की| पहले इसका नाम 'हिन्दू अनाथालय' था| सन 1930 में भागलपुर के देश भक्त नेता श्री दीपनारायण सिंह ने अपनी स्वर्गीय पत्नी श्रीमती रामानन्दी देवी की स्मृति में अनाथालय को 250 रुपये प्रतिमाह चंदास्वरूप देने का स्थायी प्रबंध किया इस कारण इसका नाम परिवर्तित कर 'रामानन्दी देवी हिन्दू अनाथालय' कर दिया गया| चंदे की ये राशि आज भी नियमित रूप से उनके स्थायी कोष से अनाथालय को मिल रही है| अब तक यहाँ पर 2200 बच्चों का भरण पोषण और शिक्षा का प्रबंध हो चुका है| यहाँ से शिक्षित होकर सेना, वकालत, अध्यापन, अन्य नौकरी इत्यादि में यहाँ के छात्र जा चुके हैं| बच्चों को यहाँ कंप्यूटर, गौशाला और खेती का भी प्रशिक्षण दिया जाता है| अबतक 30 लड़कियों की शादी यहाँ से की जा चुकी है| नौकरी और विवाह के उपरान्त इसे अपना घर मान ये सभी कभी कभी आते रहते हैं| पूर्वी बिहार की ये एकमात्र लाइसेंस प्राप्त संस्था है जो बच्चों को गोद देने केलिए अधिकृत है| अबतक 20 बच्चों को निःसंतान दंपत्ति को गोद दिया जा चूका है|
अभी यहाँ के सचिव श्री अशोक मेहरा हैं तथा अधीक्षक हैं श्री लखन लाल झा, ऑफिस स्टाफ हैं श्री दिवाकर चौधरी और प्रीतम जी, तथा 4 सेविका और 3 रसोइया है| यहाँ सभी उम्र के 55 लड़के- लड़कियाँ हैं, जिनमें 10 बच्चे स्थानीय कॉलेज में पढ़ रहे हैं और 35 बच्चे स्कूल जाते हैं तथा 10 बच्चे बहुत हीं छोटे हैं| सभी बच्चों का लालन पालन, भोजन, शिक्षा, आवास, वस्त्र, चिकित्सा इत्यादि की व्यवस्था अनाथालय करता है| अनाथालय के पास 6 बीघा कृषि योग्य भूमि है, जहाँ सब्जी उपजाई जाती है| परिसर में हीं गौशाला है ताकि बच्चों को शुद्ध दूध मुहैया कराया जा सके| अनाथालय की अपनी ज़मीन है, और पूरा मकान साफ़ सुथरा पक्के का है, सिर्फ खाना जहाँ पकता है उसकी छत फूस की है| यह अनाथालय एक ट्रस्ट के माध्यम से चलता है और इसे कोई सरकारी मदद नहीं मिलती, धन का एक मात्र स्रोत चन्दा हीं है|
… जारी
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10 comments:

kishor kumar khorendra said...

chande ke dvaaraa hi gujaaraa hotaa hai
anaathaalay kaa .......
hriday ko chhuti huii aapki lekhni ko naman ..sis .....

Priti said...

Jenny, very touching article

Mukesh Kumar Sinha said...

Di!! aapka ye chehra ek dum alag sa hai...aise lagta hai aap sabki di ho..har chhote bachche ki...:)...amma jaisee di..!!
bhagwan tumhe aisa bana kar rakhe taaki tum un sabka khayal rakh sako..!!

waise aapko iss anathalaya ka adress bhi post karna chahiye...taaki agar koi ek bhi unko help kar sake to aapka post sabse jayda sarthak hota..!

निर्झर'नीर said...

bahut jarurat hai aaj desh or samaj ko in sab ki ..aapne ek accha anubhav share kiya hai ...

madhavi alias vaani said...

hridaysparshi article.....

Khare A said...

kamaal he, itne din se ye anthalye chal raha he, lekin sarkar ki aur se koi sahayta rahi uplabdh nhi he,... ho bhi kyun, sarkar pehle hamare gareeb criketers ko to malamaal kar le, uske bad shayd inki sudh le...

ye he aaj ke bharat ka nanga sach..
shame on Indian Government..... , sharm karo bhrashtacharion, aur kitna khoon choosoge .....

Khare A said...

i too agreed with M.KSinha sahib...

u must post address or bank accoutn number if any... it will help alot these kind of anathalya... and ur message will be worthyfull... in right direction...

जेन्नी शबनम said...

@ shukriya kishor ji.

@ priti ji aapka bahut aabhar.

@ mukesh,
ye to nahi kah sakti ki mera yeh prayas koi bahut bada badlaao laayega, kyunki mere is post ko padhne wale yun bhi aap jaise bahut samvedansheel log hin hain. fir bhi itna zaroor hai ki iss maadhyam se inki baat aap sabon tak pahunch rahi.
aise anaaathalay har shahar mein hai aur har jagah ki aisi hin sthiti hai, to jo jahan hai wahaan keliye kuchh na kuchh prayas karte rahe yahi bahut hai.
bahut shukriya bhai.

जेन्नी शबनम said...

@ Neer ji, bahut achha laga aap yahan tak aaye. shukriya.

@ vaani, achha laga tumko yahan dekhkar, shukriya.

@ gaurav bhai,
desh ki haalat kya hai ye sabhi jante. koi bhookh se marta to kahin anaaj sadta. ab kya kiya jaaye? hamare samaj mein aise anaath aur anaathaalay har jagah hai, aur inki sthiti bhi aisi hin hai. sabhi anaathalay chanda se hin chalte, lekin agar sarkaar kuchh ati-aawashyak zaruraton keliye kuchh fund de to nishchit hin jivan-star mein aur unnati ho.
waise mukesh bhai ne bhi kaha aur aapne bhi ki inka account numbar ya pata ho to koi chahe to madad kar sakta hai. waise ek tasweer mein inka pura pata bhi dikh raha hai. lekin yahan dilli mein bhi aise anaathalay, vriddhashram, blind home hain, aap chaahe ya koi bhi chaahe to wahan yathaasambhav unhe madad kar sakta hai.
khushi hogi agar aaplog bhi kuchh karen inke liye.
bahut dhanyawaad.

सहज साहित्य said...

आप पूरी तरह समाज से जुड़ी हैं । आपके हर शब्द में वर्णमाला नहीं आपका हृदय धरकता है । पर्वत जैसी पीड़ा को आप बहुत साधकर उकेरती हैं । इतनी सार्थक प्रस्तुति के लिए आपको मेरा हार्दिक नमन !