साझा संसार
अंतस की रिसती भावनाएँ जिन्हें शब्दों द्वारा अभिव्यक्त कर संसार से साझा करती हूँ...
Monday, November 24, 2025
130. हैंडसम ही-मैन हीरो धर्मेंद्र
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धर्मेंद्र मेरे बचपन के समय के सबसे हैंडसम, ही-मैन, हीरो थे। ब्लैक एंड व्हाइट फ़िल्म से रंगीन फ़िल्म तक के सफ़र में मुझे सबसे आकर्षक अभिनेता ...
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Sunday, November 16, 2025
129. उम्र का 60वाँ पड़ाव
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आज मेरा 60वाँ जन्मदिन है। शून्य से 60 का सफ़र यूँ गुज़रा कि कभी तीव्र, तो कभी पलक झपकते समय के बीतने का अनुभव हुआ। जब तक पापा जीवित रहे, ख़ूब ध...
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Saturday, September 27, 2025
128. ख़ुश रहें कि हम ज़िन्दा हैं
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चित्र: गूगल से साभार पूरी दुनिया में कोरोना के संक्रमण का क़हर अब भी जारी है । कोरोना ने न धर्म पूछा , न जाति देखी , न व्यवसाय जाना , न ...
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Monday, August 25, 2025
127. वृद्धावस्था : अनुभव का पिटारा
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मानव तथा मौसम का स्वभाव एक-सा होता है। कब, क्या, कैसे, कौन, कहाँ, क्यों परिवर्तित हो जाए, पता ही नहीं चलता। यों मानव-जीवन तथा मौसम प्रकृति क...
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Thursday, June 5, 2025
126. युगीन आवश्यकता की परिणति : सन्नाटे के ख़त -दयानन्द जायसवाल
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दयानन्द जायसवाल जी और मैं (भागलपुर) 'सन्नाटे के ख़त' डॉ. जेन्नी शबनम (सर्वप्रिय विहार, नई दिल्ली) का अयन प्रकाशन से प्रकाशित यह काव्य...
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Sunday, May 25, 2025
125. सन्नाटे के ख़तों की आवाज़ -भीकम सिंह
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मेरी छठी पुस्तक 'सन्नाटे के ख़त' की समीक्षा प्रो. डॉ. भीकम सिंह जी ने की है। प्रस्तुत है उनकी लिखी समीक्षा: सन्नाटे के ख़तों की आवाज़ ...
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