साझा संसार

अंतस की रिसती भावनाएँ जिन्हें शब्दों द्वारा अभिव्यक्त कर संसार से साझा करती हूँ...

Friday, January 30, 2026

132. मम्मी की पाँचवीं पुण्यतिथि

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मम्मी की पाँचवीं पुण्यतिथि पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मम्मी के घर आई हूँ। इस बार भाई भी साथ है और पहली बार मम्मी की नज़दीकी मित्र उषा श्री...
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Thursday, January 1, 2026

131. नए वर्ष का तोहफ़ा

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समय की बीतना, मानो सूरज का रोज़ उगना और ढलना। भोर से साँझ, रात, फिर भोर अनवरत। इसी तरह हमारा जीवन चलता रहता है अनवरत। बीच-बीच में कुछ ख़ास दिन...
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Monday, November 24, 2025

130. हैंडसम ही-मैन हीरो धर्मेंद्र

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धर्मेंद्र मेरे बचपन के समय के सबसे हैंडसम, ही-मैन, हीरो थे। ब्लैक एंड व्हाइट फ़िल्म से रंगीन फ़िल्म तक के सफ़र में मुझे सबसे आकर्षक अभिनेता ...
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Sunday, November 16, 2025

129. उम्र का 60वाँ पड़ाव

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आज मेरा 60वाँ जन्मदिन है। शून्य से 60 का सफ़र यूँ गुज़रा कि कभी तीव्र, तो कभी पलक झपकते समय के बीतने का अनुभव हुआ। जब तक पापा जीवित रहे, ख़ूब ध...
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Saturday, September 27, 2025

128. ख़ुश रहें कि हम ज़िन्दा हैं

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चित्र: गूगल से साभार  पूरी दुनिया में कोरोना के संक्रमण का क़हर अब भी जारी  है । कोरोना ने न धर्म पूछा ,  न जाति देखी ,  न व्यवसाय जाना ,  न ...
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Monday, August 25, 2025

127. वृद्धावस्था : अनुभव का पिटारा

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मानव तथा मौसम का स्वभाव एक-सा होता है। कब, क्या, कैसे, कौन, कहाँ, क्यों परिवर्तित हो जाए, पता ही नहीं चलता। यों मानव-जीवन तथा मौसम प्रकृति क...
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Thursday, June 5, 2025

126. युगीन आवश्यकता की परिणति : सन्नाटे के ख़त -दयानन्द जायसवाल

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दयानन्द जायसवाल जी और मैं (भागलपुर) 'सन्नाटे के ख़त' डॉ. जेन्नी शबनम (सर्वप्रिय विहार, नई दिल्ली) का अयन प्रकाशन से प्रकाशित यह काव्य...
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Sunday, May 25, 2025

125. सन्नाटे के ख़तों की आवाज़ -भीकम सिंह

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मेरी छठी पुस्तक 'सन्नाटे के ख़त' की समीक्षा प्रो. डॉ. भीकम सिंह जी ने की है। प्रस्तुत है उनकी लिखी समीक्षा:  सन्नाटे के ख़तों की आवाज़ ...
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