साझा संसार

अंतस की रिसती भावनाएँ जिन्हें शब्दों द्वारा अभिव्यक्त कर संसार से साझा करती हूँ...

Friday, March 8, 2024

110. स्त्री-रोबोट

›
चित्र गूगल से साभार  दरवाज़े की घंटी बजी। बहुत क़रीने से साड़ी पहनी हुई एक स्त्री ने मुस्कुराते हुए दरवाज़ा खोल आने का कारण पूछा। फिर बड़े तहज़ीब ...
15 comments:
Friday, December 22, 2023

109. माझा का इमरोज़

›
इमरोज़ चले गए। आज वे अपनी अमृता से मिलेंगे। निश्चित ही जाते वक़्त वे बहुत ख़ुश रहे होंगे कि वे अपनी माझा के पास जा रहे हैं। यों वे दूर हुए ही ...
28 comments:
Thursday, December 21, 2023

108. डंकी

›
इंग्लैण्ड जाने का सपना लगभग हर भारतीय देखता है। कहीं-न-कहीं मन में यह भावना होती है कि जिस देश ने हिन्दुस्तान पर राज किया और जिसके साम्राज्य...
11 comments:
Monday, November 27, 2023

107. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI / एआई) के मायने

›
चित्र गूगल से साभार  एक दिन मेरे मोबाइल पर फ़ोन आया कि मेरा नाम, मोबाइल नंबर और आधार कार्ड का इस्तेमाल कर किसी ने कुछ कुरियर किया, जो पकड़ा गय...
6 comments:
Sunday, November 12, 2023

106. 'टाइगर 3'

›
पोस्टर के साथ मैं ''वक़्त नहीं लगता वक़्त बदलने में।'' - यह बहुत बड़ा सच है। यह पंक्ति सलमान खान और कैटरीना कैफ़ अभिनीत फ़िल्म ...
11 comments:
Tuesday, August 1, 2023

105. माँ हो न! (लघुकथा)

›
कल शाम से वसुधा दर्द से छटपटा रही थी। उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसके पाँव कटकर गिर जाएँगे। रात में ही उसने बग़ल में सोए अपने पति को उठाकर ...
14 comments:
Tuesday, May 23, 2023

104. फ़िल्म 'द केरला स्टोरी' - मेरे विचार

›
फ़िल्म 'द केरला स्टोरी' की समीक्षा या विश्लेषण करना मेरा मक़सद नहीं है, न किसी ख़ास धर्म की आलोचना या विवेचना करना है। कुछ बातें जो इस ...
9 comments:
Thursday, April 20, 2023

103. जीवन के यथार्थ से जुड़ी : मरजीना - दयानन्द जायसवाल

›
'मरजीना' क्षणिका-संग्रह जेन्नी शबनम, दिल्ली की यह कृति जीवन के यथार्थ से जुड़ी विविध पक्षों को बड़ी ख़ूबसूरती के साथ प्रस्तुत करती है। ...
14 comments:
Sunday, March 5, 2023

102. नवधा : ख़ुद को बचा पाने का संघर्ष - रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

›
तसलीमा नसरीन जी और मैं (दाहिने)   'नवधा' मेरा चौथा काव्य-संग्रह है तथा 'झाँकती खिड़की' पाँचवाँ, जिसका लोकार्पण अंतर्राष्ट्रीय...
21 comments:
Monday, January 30, 2023

101. वे जो मेरी मम्मी थीं

›
मम्मी को गुज़रे हुए आज 2 वर्ष हो गए। मम्मी अब यादें बन गईं, पर अब भी लगता है जैसे कहीं गई हैं और लौटकर आ जाएँगी। जानती हूँ वे अब कभी नहीं आएँ...
2 comments:
‹
›
Home
View web version

About

  • डॉ. जेन्नी शबनम
  • डॉ. जेन्नी शबनम
Powered by Blogger.