साझा संसार
अंतस की रिसती भावनाएँ जिन्हें शब्दों द्वारा अभिव्यक्त कर संसार से साझा करती हूँ...
Thursday, January 30, 2014
46. 'जय हो' की जय हो!
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सलमान खान के फ़िल्मों की एक ख़ास विशेषता है कि इसे हर आम व ख़ास आदमी अपने परिवार के साथ देख सकता है। सलमान द्वारा अभिनीत हर फ़िल्म से हमें...
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Wednesday, May 1, 2013
45. मज़दूर महिलाएँ : मूल्यहीन श्रम
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मैंने जब से होश सँभाला तब से फैज़ की यह नज़्म सुनती और गुनगुनाती रही हूँ- ''हम मेहनतकश जगवालों से जब अपना हिस्सा माँगेंगे इक ...
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Sunday, April 21, 2013
44. स्त्रियों के हिस्से में
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सोचते-सोचते दिमाग़ जैसे शून्य हो जाता है। मन ही नहीं आत्मा भी सदमे में है। मन में मानो सन्नाटा गूँज रहा है। कमज़ोर और असहाय होने की अनुभूति हर...
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Friday, March 8, 2013
43. हद से बेहद तक
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अक्सर सोचती हूँ कि स्त्रियों के पास इतना हौसला कैसे होता है, कहाँ से आती है इतनी ताक़त कि हार-हारकर भी उठ जाती हैं फिर से दुनिया का सामना करन...
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Monday, January 21, 2013
42. दामिनियों के दर्द से कराहता देश
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वह मुक्त हो गई। इस समाज, देश, संसार से उसका चला जाना ही उचित था। मगर दुःखद पहलू यह है कि उसे प्रतिघात का न मौक़ा मिला, न पलटवार करने के लिए...
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Wednesday, December 19, 2012
41. बलात्कार की स्त्रीवादी परिभाषा
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अजीब होती है हमारी ज़िन्दगी। शांत व सुकून देने वाला दिन बीत रहा होता है कि अचानक ऐसा हादसा हो जाता कि हम स्तब्ध हो जाते हैं। हर कोई किसी-न...
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Wednesday, December 12, 2012
40. समय की सीधी समझ (स्त्री) (12.12.12)
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समय में न जाने कौन-सा पहिया लगा होता है कि पलक झपकते कई वर्ष घूम आता है और कई बार ऐसा कि धकेलते रहो, धकेलते रहो, पर सब कुछ स्थिर, तटस्थ । ...
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