Wednesday, April 1, 2026

134. साझा संसार (गद्य-विविधा) का लोकार्पण


दिनांक 29 मार्च 2026 को 'पेड़ों की छाँव तले फाउण्डेशन' के तहत प्रथम एन सी आर लिटरेरी फ़ेस्टिवल, 2026 का आयोजन ग़ाज़ियाबाद के शम्भू दयाल पी. जी. कॉलेज में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन श्री अवधेश सिंह एवं सुश्री अनिता सिंह ने किया। सह संयोजक का कार्य डॉ. पूनम सिंह, श्री रघुवीर शर्मा एवं श्री ठाकुर प्रसाद चौबे ने किया। 
कार्यक्रम में सर्वप्रथम मेरी 7वीं पुस्तक 'साझा संसार' (गद्य-विविधा) का लोकार्पण श्री ब्रज किशोर वर्मा 'शैदी', प्रो. डॉ. राजीव रंजन गिरि, डॉ. आरती स्मित, श्री रविन्द्र कांत त्यागी, श्री सुरेंद्र अरोड़ा एवं श्री अवधेश सिंह के हाथों सम्पन्न हुआ। लोकार्पण के बाद श्री ब्रज किशोर 'शैदी', प्रो. डॉ. राजीव रंजन गिरि एवं डॉ. आरती स्मित ने पुस्तक पर वक्तव्य दिए। मेरी पुस्तक के विमोचन के बाद अन्य दो पुस्तकों का विमोचन हुआ। 
विख्यात साहित्यकारों में सुश्री ममता कालिया, श्री दिविक रमेश, श्री महेश दिवाकर, श्री वीरेन्द्र सिंह आस्तिक, श्री अशोक मिश्रा, श्री कमलेश भट्ट कमल, श्री अनिल जोशी उपस्थित रहे। कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. रोचना मित्तल जी भी मंच पर उपस्थित रहीं। इन सभी वरिष्ठ साहित्यकारों के द्वारा 'पेड़ों की छाँव तले... एक दशकीय कविता विमर्श' पुस्तक का लोकार्पण हुआ जिसका सम्पादन अवधेश सिंह जी ने किया है। इस पुस्तक में 72 कवियों की रचनाएँ शामिल हैं जिनमें मेरी भी रचनाएँ हैं। समारोह में सभी सहभागी रचनाकारों को 'साहित्यिक सरोकार स्मृति' चिह्न भेंट किया गया।इस अवसर पर कवयित्री एवं गायिका सुश्री अनुपमा त्रिपाठी ने सरस्वती वन्दना का गायन किया।
 
इस अवसर पर श्री बलराम अग्रवाल, अनिल पाराशर 'मासूम', सुश्री शानू पाराशर, श्री संजय श्रीवास्तव, सुश्री रश्मि लहर, सुश्री मधु वार्ष्णेय, मेरी पुत्री सुश्री परान्तिका दीक्षा एवं अनेक मित्रों की उपस्थिति रही। 
ममता कालिया जी से मिलना और बातें करना मेरे लिए स्मरणीय और सौभाग्यपूर्ण रहा। वरिष्ठ साहित्यकारों का सानिध्य एवं मेरी पुस्तक को इस आयोजन में अपना मंच देने के लिए अवधेश जी का बहुत-बहुत आभार। 
कार्यक्रम के बाद श्री रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' एवं सुश्री बीरबाला काम्बोज से उनके नोएडा स्थित आवास पर मिलकर मैंने आशीर्वाद लिया। कम्बोज भैया का मेरी लेखनी और पुस्तकों के प्रकाशन में सदैव योगदान रहा है। 
मेरी इस पुस्तक की भूमिका श्री रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' एवं प्रो. डॉ. राजीव रंजन गिरी ने लिखी है। इस पुस्तक को मैंने अपने पिता, माँ एवं दादी को समर्पित किया है। इन तीनों के कारण मैं हूँ और मेरे कारण मेरा साझा संसार। 























-जेन्नी शबनम (31.3.2026)
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11 comments:

जितेन्द्र माथुर said...

जानक बहुत अच्छा लगा। बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं आपको।

डॉ. जेन्नी शबनम said...

बहुत-बहुत धन्यवाद जितेन्द्र जी।

जयकृष्ण राय तुषार said...

बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें

सहज साहित्य said...

हार्दिक बधाई बहन 🌷🌹🎻

Anonymous said...

जानकारी देने के लिए बहुत बहुत आभार। प्रकाशन का सिलसिला जारी रहे,ऐसी कामना करता हूॅ।
दिनकर माटी बेगूसराय बिहार से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका समय सुरभि अनंत के निमित्त आप प्रकाश नार्थ अपनी रचना मेरे मेल पर प्रेषित कर सकतीं हैं। धन्यवाद।

विजय कुमार सिंघल 'अंजान' said...

बहुत-बहुत बधाई !

अरुण चन्द्र रॉय said...

बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं। मैं भी इस अवसर का साक्षी था।

Rashmi sanjay said...

हार्दिक शुभकामनाऍं दीदी! अनमोल कार्यक्रम का हिस्सा बनकर बहुत खुशी हुई। एक लाजवाब पुस्तक पढ़कर अभिभूत हूॅं!

Anupama Tripathi said...

शुभकामनाएँ जेन्नी जी आपके शुभ काम में मैं साक्षी बनी बहुत ख़ुश हूँ मेरे सुर सदा आपके साथ हैं!!🙏

Anonymous said...

शानदार कवरेज हुआ । आपकी और पुस्तकें भी सृजित हों । अनुपमा जी का योगदान याद रखा जाएगा । आभार धन्यवाद।

Anonymous said...

शानदार कवरेज हुआ । अपने मुश्किल स्वास्थ्य के चलते भी पर्याप्त श्रम के साथ विमोचन हेतु सक्रियता रखी । अनुपमा जी का योगदान भी भुलाया नहीं जा सकता है। आभार धन्यवाद